Thursday, June 23, 2011

ज़िंदगी अपनी.....................

गीले काग़ज़ क़ी तरह है ज़िंदगी अपनी,
कोई जलाता भी नहीं और कोई बुझाता भी नहीं |
इस कदर अकेले हो गये हैं आज कल,
कोई सताता भी नहीं और कोई मनाता भी नहीं ||

आँखो मे महफूज़ रखना सितारों को,
राह मे कहीं ना कहीं रात होगी |
मुसाफिर तुम भी हो, मुसाफिर हम ही हैं,
किसी ना किसी मोड़ पर फिर मुलाकात होगी ||

पलकों के किनारे भिगोए ही नहीं,
वो सोचते हैं कि हम रोए ही नहीं |
वो पूछते हैं ख्वाबों मे किसे देखते हो,
और एक हम हैं कि एक उम्र से सोए ही नहीं ||

दिल जीत ले वो जिगर हम भी रखते हैं,
कत्ल कर दे वो नज़र हम भी रखते हैं |
वादा किया है किसी को मुस्कराने का,
वरना आँखों मे समंदर हम भी रहते हैं ||

परिंदों को मिलेंगी मंज़िलें,
ये फैले हुए उनके पर बोलते हैं |
वही लोग रहते हैं खामोश अक्सर,
ज़माने मे जिनके हुनर बोलते हैं ||


Saturday, May 14, 2011

दिल से रोये मगर होंठो से मुस्कुरा बेठे!
यूँ ही हम किसी से वफ़ा निभा बेठे!
वो हमे एक लम्हा न दे पाए अपने प्यार का!
और हम उनके लिये जिंदगी लुटा बेठे!
सारी उम्र आँखों में एक सपना याद रहा!
सदियाँ बीत गयी पर वो लम्हा याद रहा!
न जाने क्या बात थी उन मे और हम मे!
सारी महफिल भूल गए बस वही एक चेहरा याद रहा!
आज यह कैसी उदासी छाई है

Monday, April 11, 2011

तेरी सोच से निकल जाऊंगा.........

तेरे शहर तेरी सोच से निकल जाऊंगा 
किसी उदास शाम में ढल जाऊंजा 

तू जो मुकर गया है हर बात से अपनी 
देख लेना एक दिन मैं नही बदल जाऊंगा 

मत दिखा मुझको अपना पशेमान चेहरा 
जा के तू जानता है मई पिघल जाऊंगा 

चाहे लाख तरपू  तेरे इन्तजार में 
मत लौट के आना मैं संभल जाऊँगा 

तेरा होना इतना ज़रूरी तो नहीं है
मैं तो यादों के खिलोनों से बेहाल जाऊँगा

मशरुर कर दो.........

मुझे अपने बदन की खुसबू से मशरुर कर दो 
मुझे अपनी नाज़ुक बाँहों में मशरुर कर दो 

सीने से लगा का सारे ग़म दूर कर दो 
मैं तुमसे जुदा न हो पाऊँ इतना मजबूर कर दो

लेके बाहों में तुझे होटों से इतना चूम लू 
फासले शर्म -ओ-हया के तुम भी दूर कर दो

मेरी नस नस में बस जाये जान प्यार तेरा 
मैं किसी और को न देखूं इतना मगरूर कर दो

Monday, January 24, 2011

बहुत शुक्रिया ......

तू ख्वाब था मेरा अब तू आशियाँ है 
तू चाहत थी मेरी अब तू मेरा जहाँ है 
तू वो खजाना है जिसपर हक सिर्फ फ़रिश्ते रखते है 
मै फ़रिश्ता तो नहीं पर तुने समझा मुझे तेरे काबिल 
यह तेरी ही इनायत है,
तेरे साथ हर एक पल मे भी एक जिंदगी है 
तेरे साथ हर पत्थर भी एक कोहिनूर लगता है 
तेरा हर लफ्ज़ खुदा की इबादत है 
तेरी हर सांस मेरी जिंदगी की ज़रूरत है 
बस एक वादा तू करना मुझसे ,
जाना न कभी मुझसे दूर 
जो मै चला जाऊ कभी तो आंसू मत बहाना 
तेरे आंसुओ को देखकर दिल मेरा ही टूटेगा 
खुदा करे वो दिन न आये जब तेरे आंसू निकले और मैं पूछ न पाऊ
एक वादा मैं करता हु तुझसे,
आसमान बनके मै तेरे साथ रहूँगा
जिंदगी भर ही नहीं जिंदगी के बाद भी रहूँगा
धुप बनके जब तेरे गालों पर पडूंगा
तो समझना यह मैं ही हु और मुस्करा देना 
हवा बनकर तुझको सहला दूंगा ,
रात बनकर तुझे सुला दूंगा
दिन बनकर तुझे जगा दूंगा
तेरी हर सांस मै रहूँगा, तेरी हर धड़कन में मैं जिऊंगा
ज़िन्दग भर ही नहीं जिंदगी मै बाद भी तेरे साथ रहूँगा .

लिख दो.........

एक  बार  कर  के  ऐतबार  लिख  दो 

कितना  है  मुझ  से  प्यार  लिख  दो 

कटती  नहीं  या  ज़िन्दगी  अब  तरे बिना 

कितना  और  करों  इन्तिज़ार  लिख  दो 

तरस  रहे  हैं  बड़ी  मुद्दत  से 

इस  बार  अपनी  मुहब्बत  का  इज़हार  लिख  दो 

दीवानी  हों  जाये  पर  कर  हम 

कुछ  ऐसे   तुम  मरे  यार  लिख  दो 

ज़ादा  नहीं  लिख  सकते  तो  न  लिखो  तुम 

मुहब्बत  भरे  लफ्ज़  दो  चार  लिख  दो 

एक  बार  लिखो  मुहब्बत  हाय  तुम  से 

फिर  यही  जुमला  बार  बार  लिख  दो